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Introduction

قرآن گھر اکیڈمی کا مختصر تعارف قرآن گھر اکیڈمی‘ بہار کے ضلع مغربی چمپارن کے ہیڈ کوارٹر شہر بتیا میں واقع ہے۔ اِس کی بنیاد 6 نومبر 2010ء کو جناب رضوان ریاضی نے بتیا شہر کے مشہور علاقہ محلہ چھاؤنی میں رکھی۔ اِس ادارے کا مقصد یہ ہے کہ قرآن کریم کے حفظ کے ساتھ میٹریکولیشن تک کی تعلیم اِس انداز میں دی جائے کہ طلبہ میٹرک تک اسلام کی بنیادی تعلیمات اور صحیح اسلامی عقیدے سے واقف ہو سکیں۔ پھر میٹرک کے بعد چاہیں تو مدارسِ اسلامیہ میں اپنا ایڈمیشن لیں یا پھر عصری علوم کے لیے اپنا ایڈمیشن کسی عصری کالج میں لیں۔ دراصل ایک زمانے تک یہ ہوا اُڑا دی گئی تھی کہ قرآن کریم کے حفظ کے ساتھ انگلش میڈیم کی تعلیم‘ یا انگلش میڈیم کے ساتھ حفظ کی تعلیم ناممکن ہے ۔ کچھ لوگ تو قرآن کریم کے حفظ کے معاملے کو اتنا معمہ بنا کر پیش کرتے تھے کہ گویا حفظ کرنے والا بچہ صرف قرآن ہی کا حافظ بن سکتا ہے‘ انگلش میڈیم اُس کے بس کی بات نہیں!! حالانکہ یہ اُن کی انتہائی ناتجربہ کاری تھی۔ قرآن کریم کی سورۃ القمر‘ آیت نمبر22 میں خوداللہ تعالیٰ ارشاد فرماتے ہیں: (وَلَقَدْ یَسَّرْنَا القُرْآنَ لِلذِّکْرِ فَہَلْ مِنْ مُّدَّکرٍ) کہ ’’ہم نے قرآن کریم کو سمجھنے کے لیے آسان کر دیا ہے‘ ہے کوئی سمجھنے والا‘‘۔ گو جس قرآن کریم کو پڑھنا‘ سمجھنا اور یاد کرنا جتنا آسان تھا اُتنا ہی اِن ناسمجھوں نے مشکل بنا کر اُمت کے سامنے پیش کیا۔ جس کا نتیجہ یہ ہوا کہ اُمت کا خوشحال طبقہ قرآن کریم کے حفظ سے محروم رہ گیا۔ مگر قرآن گھر اکیڈمی نے پچھلے چند سالوں میں یہ ثابت کر دکھایا کہ جن لوگوں نے حفظِ قرآنِ کریم کے ساتھ میٹرک یا عصری علوم کو ناممکن سمجھا تھا‘ یہ اُن کی بہت بڑی بھول تھی۔ کہتے ہیں کہ ہاتھ کنگن کو آرسی کیا، پڑھے لکھے کو فارسی کیا۔ چنانچہ قرآن گھر اکیڈمی کی کوشش رنگ لائی اور روزِ اول ہی سے یہ اِدارہ اپنے مقصد میں کامیاب رہا۔ یہاں سے ہر سال طلبہ کی ایک ٹیم حفظِ قرآنِ کریم کے ساتھ میٹریکولیشن کرتی ہے۔ خوشی کی بات یہ ہے کہ قرآن گھر اکیڈمی طلبہ کے لیے ہر ممکن سہولیات فراہم کرتی ہے اور انتہائی مختصر سی فیس میں اُن کے لیے کھانے پینے‘ رہنے سہنے اور تعلیم وتربیت کا ہائی کوالیٹی کا انتظام بھی رکھتی ہے جس میں ہر طبقہ کے لوگ بہ آسانی اپنے بچوں کو تعلیم دلا سکتے ہیں۔ قرآن گھر اکیڈمی میں قرآنِ کریم کے حفظ کے ساتھ اردو‘ ہندی‘ انگلش‘ حساب اور عربی زبان کی تعلیم کا ایسا حسین اِمتزاج ہے کہ طلبہ بڑے مزے سے میٹرک تک کا کورس صرف سات آٹھ سالوں میں مکمل کر لیتے ہیں۔ بتا دیں کہ ایک بچے کو کسی بھی اسکول میں نرسری سے میٹرک پاس کرنے میں گیارہ بارہ سال کا عرصہ لگ جاتا ہے جبکہ قرآن گھر اکیڈمی میں صرف سات آٹھ سال میں بچہ حفظِ قرآن کے ساتھ میٹرک کر لیتا ہے۔ قرآن گھر اکیڈمی کا یہ ریزلٹ یقینا قرآنِ کریم کی برکت کا جیتا جاگتا ثبوت بھی ہے اور قرآن گھر اکیڈمی کی بہت بڑی کامیابی کا آئینہ دار بھی۔ اور یہی وجہ ہے کہ قرآن گھر اکیڈمی کو پورے ہندوستان میں ایک نمونہ اور مثال کے طور پر دیکھا جا رہا ہے۔ ___________________

कुरान घर एकेडमी का परिचय कुरान घर एकेडमी बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के हेडक्वार्टर शहर बेतिया में है। इसकी शुरुआत 6 नवंबर, 2010 को बेतिया शहर के मशहूर मोहल्ला छावनी में जनाब रिज़वान रेयज़ी ने की थी। इस संस्था का मकसद मैट्रिक तक की पढ़ाई के साथ-साथ पवित्र कुरान को हिफ्ज करवाना है, ताकि स्टूडेंट्स मैट्रिक तक इस्लाम की बेसिक शिक्षाओं और सही इस्लामी अकीदा से परिचित हो सकें। फिर, अगर वे चाहें तो मैट्रिक के बाद इस्लामिक काॅलेज में एडमिशन ले सकते हैं या दुनियावी पढ़ाई के लिए किसी मॉडर्न कॉलेज में एडमिशन ले सकते हैं। असल में, कुछ समय तक यह माना जाता था कि पवित्र कुरान हिफ्ज करने के साथ इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई या इंग्लिश मीडियम के साथ कुरान को याद करना नामुमकिन है। कुछ लोग कुराने करीम के हिफ्ज करने के मामले को इतना मुश्किल बताते थे कि ऐसा लगता था जैसे कोई बच्चा जो हिफ्ज कर लेता है, वह सिर्फ कुरान का हाफ़िज़ ही बन सकता है, उसके लिए इंग्लिश मीडियम पढना मुमकिन नहीं है!! हालांकि यह उनका बहुत ज़्यादा अनुभवहीन होना था। पवित्र कुरान की सूरह अल-क़मर की आयत 22 में, अल्लाह तआला खुद कहते हैं: “और हमने पवित्र कुरान को याद करने के लिए आसान बनाया है, क्या कोई है जो याद रखेगा?” हालांकि पवित्र कुरान, जिसे पढ़ना, समझना और याद रखना आसान था, उसे इन नासमझ लोगों ने उम्मत के सामने मुश्किल तरीके से पेश किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि उम्मत का अमीर तबका पवित्र कुरान को याद करने से वंचित रह गया। लेकिन कुरान घर एकेडमी ने पिछले कुछ सालों में यह साबित कर दिया है कि जो लोग मैट्रिक या मॉडर्न साइंस के साथ पवित्र कुरान को याद करना नामुमकिन समझते थे, वे बहुत बड़ी गलती कर रहे थे। कहा जाता है कि हाथ कंगन को आरसी क्या, और पढ़े-लिखे को फारसी क्या। इस तरह, कुरान घर एकेडमी की कोशिशें रंग लाई हैं और यह संस्था पहले दिन से ही अपने मकसद में कामयाब रही है। हर साल, स्टूडेंट्स की एक टीम यहां से पवित्र कुरान का हाफिज बनकर अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करती है। अच्छी खबर यह है कि कुरान घर एकेडमी छात्रों के लिए हर संभव सुविधाएं प्रदान करती है और उनके लिए भोजन, आवास और बहुत कम शुल्क पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और प्रशिक्षण की भी व्यवस्था करती है, जिसमें सभी वर्ग के लोग आसानी से अपने बच्चों को शिक्षित कर सकते हैं। कुरान घर एकेडमी में उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी, मैथ और अरबी भाषा की शिक्षा के साथ पवित्र कुरान के हिफ्ज का इतना सुंदर संयोजन है कि छात्र केवल सात से आठ वर्षों में बड़े आनंद के साथ मैट्रिक तक का कोर्स पूरा करते हैं। आपको बता दें कि किसी भी स्कूल में नर्सरी से मैट्रिक पास करने में बच्चे को ग्यारह से बारह साल लगते हैं, जबकि कुरान घर एकेडमी में, एक बच्चा केवल सात से आठ साल में पवित्र कुरान को याद करके मैट्रिक पास करता है। कुरान घर ऐकेडमी का यह परिणाम निश्चित रूप से पवित्र कुरान की बरकत का एक जीता जागता सबूत है और कुरान घर एकेडमी की महान सफलता का आईना भी। और यही कारण है कि कुरान घर एकेडमी को पूरे भारत में एक मॉडल और उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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